AI Fraud,आजकल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग नौकरी घोटालों में नई शक्ल ले रहा है। स्कैमर्स अब AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फेक हायरिंग कर रहे हैं। वे स्वयं को कंपनियों के HR दल के रूप में बनाएँते हैं और लोगों को धोखेबाज वेबसाइटों पर ले जाते हैं। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता धोखाधड़ी का एक संकटपूर्ण रूप है जो भारत में बढ़ती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्कैम ने फ्रैंडल्य लगने वाले संदेशों के माध्यम से लोगों को धोखा दे रहा है। फेक हायरिंग के माध्यम से स्कैमर्स व्यक्तिगत डेटा, पैसे या लगातार धोखे करते हैं।

इस लेख में, हम समझेंगे कि AI फ्रॉड कैसे काम करता है, इसके प्रभाव और इससे बचने के तरीके क्या हैं।
मुख्य बिंदुएँ
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्कैम नौकरी चेतावनियों का मुख्य कारण है।
- फेक हायरिंग में AI का उपयोग लोगों को विश्वास में लाने के लिए किया जाता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा नौकरी के अचानक से असली देखभाल कमजोर हो रही है।
- भारत में ये घटनाएँ रोजगार शोधकों के लिए एक बड़ा संकट बन गई हैं।
- इस लेख में आपको सुरक्षा से संबंधित टिप्स और कानूनी जानकारी मिलेगी।
AI और हायरिंग फ्रॉड का बढ़ता संबंध
आजकल, AI हायरिंग टूल्स ने भर्ती प्रक्रिया को तेज कर दिया है। लेकिन, इसी प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग भी बढ़ रहा है।
हायरिंग प्रक्रिया में AI का वर्तमान उपयोग
कंपनियां AI का उपयोग करके तेजी से भर्ती प्रक्रिया पूरी करती हैं। वे नौकरी आवेदन स्वचालन और AI इंटरव्यू का उपयोग करते हैं।
फ्रॉड के लिए AI का दुरुपयोग कैसे हो रहा है
क्रैकर्स डीपफेक तकनीक और AI वॉइस क्लोनिंग का उपयोग फर्जी हायरिंग के लिए करते हैं। उदाहरणार्थ:
- डीपफेक वीडियो इंटरव्यू के लिए फेक प्रोफाइल्स बनाए जाते हैं
- AI धोखाधड़ी तरीके से फिशिंग मेसेज्स भेजे जाते हैं
भारत में AI फ्रॉड की बढ़ती घटनाएँ
भारत में 2023 में धोखाधड़ी की संख्या 40% बढ़ गई है। यहाँ कुछ डेटा देखें:
क्षेत्र | फ्रॉड की दर |
---|---|
IT | 25% (2023) |
बैंकिंग | 18% (2023) |
2024 में भारत में साइबर अपराध 30% बढ़ने की संभावना है। यह चिंताजनक है।
“ऑटोमेशन की विश्वसनियत के लिए, व्यक्ति डेटा की सुरक्षा की जरूरत है,” – नौकरी मार्केटिंग की एक विशेषज्ञ
ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया में डिजिटल धोखाधड़ी बढ़ रही है। इसमें AI फ्रॉड तकनीकें भी शामिल हैं।
यह भारत में नौकरी चाहने वालों के लिए एक बड़ी समस्या है। डेटा हैकिंग और AI वॉइस क्लोनिंग से व्यक्ति की जानकारी चोरी हो रही है।
AI Fraud: स्कैमरों ने AI को ही बना लिया ठगी का जरिया
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके ठगी को और भी खतरनाक बनाया जा रहा है। AI हैकिंग के जरिए, ठगी करने वाले लोग फेक आईडी और स्वर क्लोनिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।
- लक्ष्य निर्धारित करें: AI डेटा एनालि�टिक्स से उन उपयोगकर्ताओं का चयन करें जो नौकरी के लिए सक्रिय हैं।
- फेक ईमेल और साइट बनाएं: AI से गठित फेक HR पत्र और वेबसाइटें व्यक्तियों को लगाएं।
- फ़ीचर्स उपयोग: वीडियो इंटरव्यू में डीपफेक तकनीकें लाइव रिप्लाईज को बनाएं।
पारंपरिक धोखाधड़ी | AI आधारित फ्रॉड |
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मैन्युअल डेटा का उपयोग | AI अल्गोरिदमों का उपयोग |
मजबूत सुरक्षा बचाने के लिए | अधिक विशिष्ट और छिपे हुए |
एक नवीन तर्क: “स्मार्ट फ्रॉड इंडस्ट्री में, AI के माध्यम से ठगी के लिए डेटा अनुकूलित किया जाता है, जिससे फ्रॉड अधिक प्रभावी हो जाता है।” – वाइट पेपर 2023 का एक मुख्य निष्कर्ष
इन स्कैमरों के पास संगठित टीमें होती हैं जो AI स्कैम तरीके का उपयोग करके डेटा चोरी या वित्तीय लाभ उठाते हैं। वे अपने अभियानों को ऐप्पलिकेशन प्रोसेसिंग या बिजनेस ऑटोमेशन टूल्स में छिपाते हैं।
फेक HR कैसे पहचानें: AI द्वारा निर्मित छलावे
आजकल, धोखेबाज AI का उपयोग करके फेक हायरिंग करते हैं। यहां व्यवसायियों को AI वॉइस स्कैम, डीपफेक वीडियो, और संदिग्ध संचार की पहचान करने के तरीके सिखाए जाएंगे।
AI वॉइस क्लोनिंग के माध्यम से धोखा
AI वॉइस स्कैम में, धोखेबाज वास्तविक HR के आवाज़ को क्लोन करते हैं। ऑडियो धोखाधड़ी को पहचानने के लिए ध्यान दें:
- अजीब स्वर गति या असामान्य पैटर्न
- अजीब प्रतिक्रियाएँ, जैसे अनुकूलित उत्तरों की कमी
AI वॉइस क्लोनिंग से बचने के लिए, वीडियो कॉल में सीधे संपर्क करने की मांग करें।
डीपफेक वीडियो इंटरव्यू की पहचान
डीपफेक टेक्नोलॉजी से वीडियो मैनिपुलेशन करके धोखेबाज फेक इंटरव्यू बनाते हैं। वॉइस डीपफेक की चेतावनी के लिए ये संकेत देखें:
- चेहरे की असंगत गति या अस्वाभाविक भाव
- वीडियो के कोने में ग्राफिकल असामान्यताएँ
संदिग्ध ईमेल और मैसेज के संकेत
ईमेल धोखाधड़ी के लिए ध्यान दें: फिशिंग ईमेल पहचान के लिए:
- अजीब लिंक्स या तत्कालिन जवाब मांगने वाली मैसेज
- अशुद्ध व्याकरण या अनावश्यक स्वरूपों का उपयोग
डिजिटल मीडिया फॉरेंसिक टूल्स का उपयोग करके फेक वीडियो डिटेक्शन करें।
इस तरह काम करता है फेक हायरिंग स्कैम
फेक हायरिंग स्कैम का काम बहुत सावधानी से किया जाता है। ये स्कैम लोगों को धोखा देने के लिए बनाए जाते हैं।
- लक्ष्य चयन: स्कैमर्स लिंक्डइन और नौकरी पोर्टल जैसे साइट्स से लोगों को ट्रेक करते हैं।
- फेक रिक्रूटमेंट स्कीम की शुरुआत: वे प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम या कल्पनात्मक कंपनियां बनाते हैं।
- फेक जॉब ऑफर प्रक्रिया: एक संगठित इंटरव्यू प्रक्रिया का प्रदर्शन करते हैं जिसमें वीडियो कॉल, टेस्ट या रिफील फीस का माँग होता है।
- अंतिम चरण: वे व्यक्ति से पैसे, बैंक विवरण, या व्यक्तिगत डेटा मांगते हैं।
भारत में भी ये स्कैम बढ़ रहे हैं। स्कैमर्स डीपफेक्ट टेक्नोलॉजी या AI का उपयोग करते हैं।
“फेक रिक्रूटमेंट स्कीम में सबसे बड़ा खतरा यह है कि व्यक्ति अपने डेटा का निर्भर्ता से साझा कर देते हैं।”
इन स्कैम्स का मुख्य उद्देश्य वित्तीय नुकसान या आईडेंटिटी थीफ्ट है। स्कैमर्स ईमेल टेम्पलेट्स, फ़ाक्टिश्यू डॉक्युमेंट्स और वैध लॉगो का उपयोग करते हैं।
एक आम फ़ॉर्मट में, स्कैम के माध्यम से व्यक्ति को फेक रिक्रूटमेंट स्कीम में शामिल होने के बाद, उन्हें बैंकिंग डेटा, एडवांस फीस, या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन्स का माँग किया जाता है।
भारत में, स्कैमर्स एक विश्वसनीय कंपनी का नाम लेते हैं। वे एक वैध लॉगो या वेबसाइट का उपयोग करते हैं।
ये रोजगार धोखाधड़ी के तहत काम करते हैं। उन्हें फाइनेंशियल फ्रॉड या लॉन्ड्रिंग के लिए उपयोग किया जाता है।
नौकरी चाहने वालों पर AI फ्रॉड का प्रभाव
आईएआई फ्रॉड से लोगों को वित्तीय, डेटा और मानसिक स्तर पर बहुत नुकसान होता है। यह आर्थिक धोखाधड़ी और डिजिटल पहचान संरक्षण के अन्याय के कारण होता है।
वित्तीय नुकसान के प्रकार
लोगों को फाइनेंशियल स्कैम के चक्र में पैसा देना पड़ता है। इसमें प्रोसेसिंग फीस या फेक ट्रेनिंग मटेरियल्स के लिए पैसा हेराफेरी करनी पड़ती है।
नौकरी घोटाला नुकसान में बैंक खातों का अवैध उपयोग भी शामिल है। यह वित्तीय छलावा का एक बड़ा उदाहरण है।
- प्रोसेसिंग फीस वसूलने के लिए फ़ैक्टूर्स
- डिजिटल पहचान संरक्षण के कमजोरी के कारण डेटा लीक
- क्रेडिट कार्ड जानकारी का दुरुपयोग
व्यक्तिगत डेटा चोरी के परिणाम
डेटा चोरी से आइडेंटिटी थेफ्ट होता है। आधार कार्ड, पैन, या पासपोर्ट का दुरुपयोग हो सकता है।
यह डेटा लीक उपभोक्ताओं के क्रेडिट स्कोर को भी प्रभावित कर सकता है।
मानसिक प्रभाव और ट्रॉमा
साइबर धोखाधड़ी मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा प्रभाव डालती है। नौकरी स्कैम ट्रॉमा लोगों को अवसाद या अनिश्चितता में डाल सकता है।
“स्कैम से जुड़े भावनात्मक प्रभाव को नजरअंदाज़ न करें, सहायता सेवाओं से संपर्क करें।”
विशेषकर, स्कैम पीड़ित सहायता के लिए जनरल फीडरल या सार्वजनिक सहायता संगठनों की सलाह दी जाती है। मनोवैज्ञानिक समर्थन सेवाओं का महत्व बताया जाता है।
जैसे कि मनोरोगी या समूहों में भाग लेना।
डिजिटल युग में, डेटा चोरी के परिणाम जीवनभर कीमती हो सकते हैं। लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचने के उपाय सीखने चाहिएं।
कंपनियों के लिए AI फ्रॉड के खतरे
AI फ्रॉड ने कंपनियों के लिए बड़ा कंपनी प्रतिष्ठा जोखिम पैदा किया है। यह धोखाधड़ी के कारण उनके ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है। फेक वेबसाइटों या ईमेल्स के माध्यम से धोखाधड़ी की जा सकती है।
AI फ्रॉड का सबसे बड़ा खतरा कॉर्पोरेट आइडेंटिटी थेफ्ट है। इसमें लॉगो, फॉर्म, और संपर्क विवरण के साथ फैक्टिश नौकरी वेबसाइटें बनाई जाती हैं। यह कॉर्पोरेट साइबर सुरक्षा की कमी के कारण होता है।
खतरे | प्रभाव | नियम |
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कॉर्पोरेट आइडेंटिटी थेफ्ट | खराब ब्रांड इमेज | एक्सपर्ट डिटेक्शन सिस्टम |
कंपनी प्रतिष्ठा जोखिम | खराब विकल्पों का उपयोग | बिजनेस फ्रॉड प्रोटेक्शन की योजना |
कंपनियों को बिजनेस फ्रॉड प्रोटेक्शन सिस्टम का उपयोग करना चाहिए। वे कॉर्पोरेट साइबर सुरक्षा के लिए विश्वसनीय स्ट्रैटेजी भी अपना सकती हैं। इससे स्कैम रोकने में मदद मिलेगी और ब्रांड इमेज की सुरक्षा भी होगी।
कंपनियाँ ब्रांड मॉनिटरिंग टूल्स का उपयोग कर सकती हैं। ये कॉर्पोरेट आइडेंटि�टी थेफ्ट की चेतावनी देते हैं। यह फ्रॉड से सुरक्षा प्रदान करता है और कंपनी प्रतिष्ठा को संरक्षित रखता है।
भारत में हुए प्रमुख AI हायरिंग फ्रॉड के मामले
भारत में AI का उपयोग बढ़ रहा है। इससे IT स्कैम केस स्टडी में वृद्धि हुई है। इसमें तकनीकी क्षेत्र धोखाधड़ी के कई रूप देखे जाते हैं। AI से फ्रीलांस और बैंकिंग सेक्टर फ्रॉड के मामले सामने आए हैं।
IT सेक्टर में IT कंपनी फ्रॉड के कई मामले सामने आए हैं। हैकर्स ने Infosys के नाम पर फेक जॉब वैकन्सी पोस्ट की। इस सॉफ्टवेयर नौकरी स्कैम में 500+ लोगों को धोखा दिया गया।
- टेक इंडस्ट्री धोखाधड़ी: फेक डेटा एंट्री और फर्जी वर्क-फ्रॉम-होम जॉब्स की विज्ञापन
- बैंकिंग सेक्टर फ्रॉड: 2023 में, SBI और ICICI के नाम पर फेक फाइनेंस जॉब स्कॐम में लोगों से वैलिडेशन फीस चुकाने की माँग की गई
फ्रीलांसिंग मार्केट में फ्रीलांसर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। AI डीपफेक वीडियो का उपयोग किया जाता है। गिग इकोनॉमी फ्रॉड में फ्रीलांसरों को अग्रिम भुगतान के लिए प्रेसर दिया जाता है।
“फ्रीलांसिंग स्कॐम में 2023 में ₹5 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ,” – 2023 की NCRB रिपोर्ट
वित्तीय क्षेत्र में फाइनेंशियल सर्विसेज फ्रॉड के मामले सामने आए हैं। लोगों को KYC फॉर्म भरने के लिए मजबूत डाक्टरी दी जाती है। बैंक नौकरी धोखाधड़ी में, चालकों ने 100+ लोगों की जानकारी चोरी की थी।
ऑनलाइन काम धोखाधड़ी में फ्रीलांसिंग प्लेटफॉर्म्स पर रिमोट जॉब स्कॐम के बारे में जानकारी मिलती है। लोगों से डिपॉज़िट या निकाम के नाम पर मांग की जाती है।
फेक हायरिंग से बचने के उपाय
जब आपको किसी जॉब ऑफर मिलता है, तो पहले नौकरी धोखाधड़ी बचाव के बारे में जानें।
“सुरक्षित नौकरी ढूंढने के लिए, कंपनी के आधिकारिक वेबसाइट और लोगो पर ध्यान दें।”
- फेक जॉब ऑफर पहचानने के लिए, कंपनी के आधिकारिक ईमेल डोमेन की जाँच करें। (जैसे: @company.com के बजाय @unknownservice.in).
- वीडियो इंटरव्यू में अजीब बोलचाल या स्पष्ट चित्र देखें, तो संदेह हो सकता है। यह AI फ्रॉड का संकेत हो सकता है।
- ईमेल या वेबसाइट से कोई फीस या व्यक्तिगत डेटा मांगें, तो स्कैम से सुरक्षा के लिए तुरंत संपर्क करें।
नौकरी पोर्टलों पर अजीब वेतन या अनुबंध की मांग हो, तो यह फेक जॉब ऑफर पहचान का संकेत है।
अपने मोबाइल या बैंकिंग डेटा स्कैमरों को नहीं दें। भारतीय कंपनियाँ जैसे TCS, Reliance, या HDFC अपने आधिकारिक वेबसाइट्स पर जॉब्स पोस्ट करती हैं।
अपने संदिग्ध अनुभवों को भारतीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग साइट पर रिपोर्ट करें। AI फ्रॉड प्रिवेंशन के लिए, व्यक्तिगत डेटा की पहचान करने वाले प्रश्नों से बचें। सदा कंपनी के HR के सीधे फोन या आधिकारिक लिंक पर जाएँ।
कंपनियां कैसे करें AI फ्रॉड से सुरक्षा
AI द्वारा फ्रॉड के खिलाफ लड़ने के लिए, तीन महत्वपूर्ण चरण हैं। पहला, कर्मचारियों को जागरूक बनाना है। दूसरा, सुरक्षित भर्ती प्रक्रियाएं अपनाना। तीसरा, तकनीकी समाधानों का उपयोग करना है।
कर्मचारियों के लिए जागरूकता प्रशिक्षण
- कर्मचारियों को कंपनी सुरक्षा ट्रेनिंग के माध्यम से फ्रॉड के लक्षणों को सिखाएं।
- आज़ाद बातचारियों में साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस को विशेष ज़ोर दें, जिससे कर्मचारी AI-आधारित धोखे से पहचान सकें।
सुरक्षित हायरिंग प्रक्रिया के लिए प्रोटोकॉल
कंपनियां फ्रॉड प्रिवेंशन प्रोग्राम लागू करें:
- अपने वेबसाइट और सोशल मीडिया पर नियुक्ति सुरक्षा मानक अनुसार अधिकृत भर्ती लिंक उपलब्ध कराएं।
- उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट्स की रिक्रूटमेंट सिक्योरिटी के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करें।
AI फ्रॉड की डिटेक्शन तकनीकें
आधुनिक AI मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग करके कंपनियां निम्न कार्रों को लागू कर सकती हैं:
- फ्रॉड डिटेक्शन टूल्स जैसे डीपफेक डिटेक्शन के लिए एमएलएस-आधारित सॉफ्टवेयर।
- साइबर सुरक्षा AI के मॉडल्स द्वारा फिशिंग मेल्स और स्कैम ईमेल्स को रिएल-टाइम में निकालें।
इन समाधानों का उपयोग करके कंपनियां HR सुरक्षा प्रक्रिया को मजबूत बना सकती हैं।
AI हायरिंग फ्रॉड से जुड़े कानूनी पहलू
भारत में AI हायरिंग फ्रॉड के खिलाफ कई कानून हैं। साइबर कानून भारत और डिजिटल धोखाधड़ी कानून इन अपराधों के खिलाफ काम करते हैं। AI क्राइम लीगल फ्रेमवर्क के अनुसार, आप फ्रॉड कानूनी कार्रवाई और साइबर अपराध शिकायत के माध्यम से कार्रवाई कर सकते हैं।
कानून | विवरण |
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सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 | सेक्शन 66C और 66D में डिजिटल धोखाधड़ी की प्रतिबंधन |
भारतीय दंड संहिता | सेक्शन 420 और 463 में मिथ्या व्यापार और डाकृति का विरोध |
डिजिटल साइनेटच्यूरेट्स अधिनियम, 2000 | डिजिटल फ्रॉड में उपयोगी प्रमाणों की मान्यता |
कानूनी कार्रवाई के लिए निम्नलिखित चरण आवश्यक हैं:
- साइबर सेल के साथ संपर्क करें या साइबर अपराध शिकायत की ऑनलाइन फॉर्म भरें
- कानूनी वकील की मदद से फाइलिंग करें
- संबंधित कार्यक्रमों के तहत राज्य सरकारी ऑफिसों के साथ संपर्क करें
कंपनियां AI क्राइम लीगल फ्रेमवर्क का पालन करना चाहिए। वर्तमान फ्रॉड कानूनी कार्रवाई में देरी और अनुमानों की समस्याएँ हैं। इसलिए, संघ और राज्य सरकारों को संशोधनों की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
आजकल भारत में AI फ्रॉड से संबंधित हायरिंग स्कैम बढ़ रहे हैं। सबको डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरी है।
लोगों को AI फ्रॉड से बचने के लिए सावधानियां सीखनी चाहिए। नौकरी फ्रॉड को रोकने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।
कंपनियों को सुरक्षित नौकरी तलाश प्रक्रियाएं बनानी चाहिए। वे ईमेल, वीडियो, और वॉइस कॉल में छिपे छल को पहचानने के लिए लोगों को सिखाएं।
सरकार, कंपनियाँ, और नागरिकों को मिलकर काम करना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में साइबर सुरक्षा के बारे में अधिक शिक्षा देनी चाहिए।
एक सुरक्षित भविष्य के लिए, सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है। अपने आसपास के लोगों को भी इस जानकारी को साझा करें। ताकि अधिक लोग AI फ्रॉड से बच सकें।
FAQ
AI हायरिंग फ्रॉड क्या है?
AI हायरिंग फ्रॉड एक प्रकार का धोखा है। इसमें स्कैमर्स लोगों को नौकरी के झांसे में फंसाते हैं। वे खुद को HR पेशेवर बताकर नौकरी की पेशकश करते हैं।
स्कैमर्स AI का उपयोग कैसे करते हैं?
स्कैमर्स वॉइस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो बनाने के लिए AI का उपयोग करते हैं। वे फिशिंग ईमेल भेजकर भी लोगों को धोखा देते हैं।
AI फ्रॉड से कैसे बचा जा सकता है?
AI फ्रॉड से बचने के लिए, नौकरी चाहने वालों को कंपनी की जांच करनी चाहिए। वे संदिग्ध जॉब ऑफर को पहचानें और आधिकारिक संपर्क चैनल से सच्चाई पूछें।
क्या AI हायरिंग फ्रॉड से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है?
हाँ, AI हायरिंग फ्रॉड के लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भारत में साइबर अपराध के खिलाफ कानूनों का उपयोग किया जा सकता है।
क्या AI फ्रॉड का प्रभाव केवल व्यक्ति पर पड़ता है?
नहीं, AI फ्रॉड का प्रभाव केवल व्यक्ति पर नहीं होता। यह कंपनियों की प्रतिष्ठा और वित्तीय सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है।
क्या कोई संकेत है जो बताता है कि मुझे धोखा दिया जा रहा है?
हां, संकेतों में अजीब आवाज़, असामान्य ईमेल पते, और अतिशयोक्तिपूर्ण वादे शामिल हैं। जल्दी में निर्णय लेने का दबाव भी एक संकेत है।
क्या फेक HR प्रोफेशनल्स को पहचानना संभव है?
हाँ, फेक HR प्रोफेशनल्स को पहचानने के लिए उनकी संचार शैली और वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचें। कंपनी की पहचान भी महत्वपूर्ण है।
AI और साइबर सुरक्षा में कौन-से कदम उठाए जा सकते हैं?
AI और साइबर सुरक्षा के लिए, कंपनी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर सकती है। सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना और AI फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम का उपयोग करना भी महत्वपूर्ण है।